Patna Zoo | जानिए संजय गांधी जैविक उद्यान पटना की खास बातें ।

Patna Ka Chidiyaghar

संजय गांधी जैविक उद्यान

बिहार राज्य की राजधानी पटना जो की अपने दर्शनीय स्थलों के लिए अति प्रसिद्ध है, के बेली रोड पर संजय गांधी जैविक उद्यान स्थित है जिसे चिड़िया घर पटना या Patna Zoo के नाम से भी जाना जाता है। इसे 1973 में एक चिड़ियाघर के तौर पर खोला गया था।

इसे जैविक उद्यान इसलिए कहते है क्योंकि यह वनस्पति और जन्तु दोनों प्रकार का उद्यान हैं। इस चिड़ियाघर की गिनती देश के बेहतरीन चिड़ियाघरों में होती है। यहाँ आपको देश विदेश के पेड़- पौधे, पक्षियों, स्तनपायी, सरीसृप एवं मछलियों की भिन्न-भिन्न प्रकार की प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी। यहाँ पर मनोरंजन के विभिन्न साधन मौजूद हैं जैसे-खिलौना ट्रेन, थ्री-डी थियेटर, जंगल ट्रेल, ट्री-हाउस।

यहाँ दुर्लभ प्रकार की वनस्पतियों के प्रदर्शन लिए ग्लास हाउस, औषधीय पौधों की नर्सरी, एक फ़र्न हाउस, गुलाब उद्यान और आर्किड हाउस बनाए गए हैं। जो की इस उद्यान की सुंदरता को चौगुनी कर देतें हैं। Patna Zoo, पटना का सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं यहां पर नए साल के अवसर पर करीब 36,000 लोग आए थे।

Patna Zoo में साल में करीब 30 लाख से ज्यादा लोग घूमने के लिए आतें हैं। जल्द ही यहाँ तीन ग्रीन एनाकोंडा, तीन डबल हॉर्न राइनो जो की विलुप्त होती प्रजाति का सदस्य है व तीन नाइल क्रोकोडाइल अफ्रीका से मंगायें जाने की योजना है। इससे संजय गाँधी जैविक उद्यान में आने वालें पर्यटकों को और आनंद आएगा।

यह जू घूमने की पसंदीदा जगह है। यहाँ आने वाले लोग यहाँ की तारीफ करते नहीं थकतें हैं। पटना जू में जल्द ही मुफ्त हाईस्पीड वाई- फाई की सुविधा भी मिलने वाली है। इसकी स्पीड 1024 एमबीपीएस होगी। यह स्पीड ना केवल Patna Zoo बल्कि पूरे पटना में सबसे ज्यादा है। जू के पर्यटक एक साथ भी अगर इसक इस्तेमाल करने के बाद भी इसकी स्पीड कम नहीं होगी।

अगर आप भी प्रकृति प्रेमी हैं और दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधे और जंतुओं को देखना चाहतें हैं तो पटना जू आपके लिए घूमने का सबसे उचित स्थान है। पटना चिड़ियाघर की विशेषताओं, यहाँ आने का सही समय, पटना जू समय सारिणी, पटना जू टिकट प्राइस और भी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

Patna Zoo का इतिहास:

बिहार के तत्कालीन राज्यपाल श्री नित्यानंद कानूनगो द्वारा 1969 में संजय गाँधी जैविक उद्यान को गवर्नर हाउस परिसर से दी गई लगभग 34 एकड़ (14 हेक्टेयर) भूमि पर एक वनस्पति उद्यान के रूप में बनाया गया था। 1972 में, लोक निर्माण और राजस्व विभाग ने पार्क के विस्तार के लिए क्रमशः 58। 2 एकड़ (23। 6 हेक्टेयर) और 60। 75 एकड़ (24। 58 हेक्टेयर) भूमि वन विभाग को दी।

1972 में वन विभाग, बिहार सरकार द्वारा इस का नाम जैविक उद्यान कर दिया गया। वर्ष 1980 में इसका नाम बदलकर संजय गाँधी जैविक उद्यान कर दिया गया। राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग से अधिग्रहित भूमि को 8 मार्च 1983 को संरक्षित वन घोषित कर दिया।

Patna Zoo के मुख्य आकर्षण:

पटना जू न केवल देश बल्कि विदेश में भी अपने दुर्लभ प्रजाति के जानवरों और पेड़ पौधों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। पार्क घूमने के लिए आप बैटरी से चलने वाले ऑटो का उपयोग भी कर सकतें हैं।

समय-समय पर इस पार्क में मनोरंजन के नए-नए इंतजाम किए जातें हैं। इससे यहाँ घूमने आने वाले पर्यटकों की उत्सुकता बनी रहती है और वें बार-बार यहाँ आना पसंद करतें है। पटना जू के मुख्य आकर्षण निम्न हैं:

Patna Zoo के पशु:

पटना जू में अभी 800 से भी ज्यादा प्रकार के जीव-जन्तु मौजूद है। इनमें से ज्यादातर जानवर काफी दुर्लभ प्रजाति के हैं। इस जू में करीब 110 प्रजाति के जानवर मौजूद हैं। यहाँ पर आपको पहाड़ी मैना, हिरण, अजगर, हाथी, गैंडें, दरियाई घोड़ा, सफेद मोर से लेकर चित्तीदार हिरण, मगरमच्छ, चिंपाजी, शेर, हिमालय का कला भालू, एमू, शुतुरमुर्ग,जिराफ़, तेंदुआ,घड़ियाल,सियार और काले हिरन तक देखने को मिल जाएंगे।

पटना जू अपने रॉयल बंगाल टाइगर के लिए बाद प्रसिद्ध है। वर्तमान में जू में 1 सफेद और 2 सामान्य रंग के रॉयल बंगाल टाइगर मौजूद है। ये जानवर यहाँ आने वाले पर्यटकों की बहुत ही पसंद है। यहाँ के साँप घर में करीब पाँच प्रजाति के 32 साँप रखे गए हैं। यहाँ पर मछलियों का एक एक्वेरियम मछली घर भी है जहां पर मछलियों की लगभग 35 प्रजातियां रहतीं हैं।

बच्चे पटना जू बड़े ही शौक के साथ आते हैं। शोधकर्ताओं के लिए भी पटना जू पहली पसंद है क्योंकि उन्हे यहाँ अपने शोध के लिए सारी जानकारी बड़ी ही आसानी से मिल जाती है। वेटनरी कॉलेज के छात्र-छात्राएँ भी यहाँ जानवरों पर शोध करने के लिए आते रहतें हैं।

Patna Zoo में पाए जाने वाले कुछ दुर्लभ प्रजाति के जानवरों का विवरण नीचे दिया गया है:

लायन टेल मकैक:

लायन टेल मकैक भारत के पश्चिमी समुद्र तट के आसपास पाया जाता है। इसकी शक्ल-सूरत काफी हद तक शेर से मिलने के कारण इसे शेर पूंछ बंदर या लायन टेल मकैक भी कहा जाता है। इसे नील गिरी लंगूर भी कहा जाता है। शेर की तरह इनके गले पर हल्के भूरे रंग के बाल होते हैं। इनकी पूंछ भी शेर की पुंछ जैसी ही होती है। यह शाकाहारी होते हैं।

ये सदाबहार जंगलों में रहतें हैं और फल और अनाज खाते हैं। लायन टेल मकैक लुप्त प्राय जानवरों की श्रेणी में आतें हैं। बहुत तेजी से लुप्त होने के कारण भारत में अब बस ये 3000-4000 ही बचे हैं। ये अक्सर 40 से 60 के समूह में रहतें हैं। इन्हे समूह में रहना पसंद होता है। ये दोनों शेर पूंछ बंदर चेन्नई के बंडालूर जू से मंगायें गए है।

One Horned Rhinoceros (एक सींग वाला गैंडा) :

एक सींग वाला गैंडा दुनिया की सबसे बड़ी राइनो प्रजाति है। यह गैंडा भारतीय उप-महाद्वीप का मूल निवासी है । अंधाधुंध शिकार के कारण एक सींग वाले इस गैंडे की आबादी बहुत कम हो गई थी और इसे IUCN रेड सूची में असुरक्षित डाल दिया गया है।

संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना एक सींग वाले गैंडे के सफल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 1979 में यहाँ असम से काँचा, कांची और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से राजू नाम के गैंडों को मंगाया गया। वर्ष 1988 में कांची ने हरताली नाम की मादा गैंडा को जन्म दिया। तबसे हर साल जू में कम से कम एक शिशु गैंडा जन्म लेता है।

रॉयल बंगाल टाइगर :

संजय गांधी जैविक उद्यान की शान, रॉयल बंगाल टाइगर एक शाही जानवर है जो अपनी ताकत के लिए जाना जाता है। पटना ज़ू में सामान्य और सफेद दोनों ही रंग के रॉयल बंगाल टाइगर मौजूद है।

वर्ष 1975 में दिल्ली चिड़ियाघर ने एक नर बाघ मोती और वर्ष 1980 में, असम से दो मादा बाघिनें बल्बोरानी और फौजी यहाँ आईं। 01-01-1983 को बल्बोरानी ने पहली मादा बाघ शावक को जन्म दिया जिसके पटना चिड़ियाघर में बाघों का संरक्षण प्रजनन शुरू हुआ। वर्तमान में संजय गांधी जैविक उद्यान में एक सफेद और दो सामान्य रंग रॉयल बंगाल टाइगर हैं।

वनस्पति उद्यान:

पटना जू पहले वनस्पति उद्यान के तौर पर ही शुरू हुआ था। यहाँ के वनस्पति उद्यान में आपको पेड़ों, जड़ी बूटियों और झाड़ियों की 300 से अधिक प्रजातियां देखने को मिल जाएंगी। इसके अलावा संजय गांधी जैविक उद्यान में पेड़ों को ट्रांसप्लांट भी किया जा रहा है।

इस विधि में सड़क निर्माण या किसी अन्य प्रकार के निर्माण में बाधक बन रहे पेड़ों को ट्रांसप्लांट करके किसी दूसरी जगह पर लगा दिया जाता है। पटना जू में इस विधि से करीब 30 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जा चुका है।

धन्वंतरी उद्यान:

पार्क के पूर्वी भाग में राजभवन की चारदीवारी के किनारे स्थित हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों की तीस से अधिक प्रजातियाँ लगी हुई है। इस उद्यान को धन्वंतरी उद्यान के नाम से भी जाना जाता है। इस उद्यान में एक सीमेंट के बने मानव शरीर के अंगों पर जड़ी बूटियों और झाड़ियों को लगाकर पौधों के औषधीय गुणों और वह किस अंग पर काम करतें है।

इस बात को काफी अलग ढंग से दिखाया गया है। यह उद्यान पटना में कई महत्वपूर्ण हर्बल पौधों के एक महत्वपूर्ण भंडार के रूप में कार्य करता है। इस उद्यान में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्र शैक्षिक उद्देश्य से आते हैं।

ग्रीन हाउस:

ग्रीन हाउस में करीब पचास से अधिक प्रजाति के छायादार पौधों, फ़र्न लगाए गए है, यह यहाँ आने वाले पर्यटकों विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज के छात्रों को बहुत आकर्षित करता है।

रोज़ गार्डन:

पार्क के बीचों-बीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क के किनारे एक गुलाब का बाग लगाया गया है। यह पार्क पर्यटकों के लिए एक अच्छा आकर्षण है। चार खंडों में विभाजित, बगीचे में चारों भागों में अलग-अलग रंगों के गुलाब खिलतें हैं, इन चार भागों को सुंदर रास्तों से सजाया गया है।

ट्री हाउस:

वरिष्ठ प्रशासनिक भवन के पास मुख्य सड़क के किनारे एक सफेद सिरीस के पेड़ पर बना एक सुंदर ट्री हाउस बनाया गया है। यह एक अच्छी तरह से सुसज्जित डबल बेड केबिन है, जिसमें रात के ठहरने की सुविधा हुआ करती थी। अब यह ट्री हाउस केवल लोगों के देखने के लिए है। अब यहाँ किसी को भी रहने की अनुमति नहीं है।

Toy Train (छोटी रेलगाड़ी) :

अगस्त 1977 में पटना ज़ू में टॉय ट्रेन की सुविधा में शुरू की गई थी, जब भारतीय रेलवे ने एक इंजन और दो डिब्बों को उपहार में दिया था। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी, जमशेदपुर ने भी 1590 मीटर लंबी पटरी बिछाने के लिए मदद की। वर्ष 2004 में, इस ट्रैक की लंबाई 4368 मीटर तक बढ़ा दी गई। इस ट्रेन में बैठकर पूरे पार्क का चक्कर लगाया जा सकता था। रेलवे ने जू को सुरस नाम की एक नई ट्रेन भी भेंट की।

इस ट्रेन में चार कोच हैं जिसमें एक साथ 20 लोग बैठ सकतें हैं। इसके अलावा रेल मंत्रालय ने जू को एक भाप इंजन भी दिया है। वर्तमान में यह भाप इंजन रेलवे प्लेटफॉर्म के पास रखा गया है। इस टॉय ट्रेन के तीन मिनी स्टेशन हैं। तकनीकी दिक्कतों के कारण अब ये ट्रेन नहीं चलती है। इसके स्थान पर अब जू में एक नई ट्रैकलेस टॉय ट्रेन लाई गई है।

ट्रैकलेस टॉय ट्रेन:

इस ट्रेन में 20-20 सीट वाले दो कोच हैं। इस ट्रेन में करीब 40-45 लोग एक साथ बैठकर पार्क का चक्कर लगा सकतें हैं। यह ट्रेन गुजरात के बलसाड से मंगाईं गई है। यह ट्रेन बैट्री से चलती है। इस ट्रेन की खास बात है की यह काफी धीरे-धीरे चलती है और जरा भी शोर नहीं करती है। ट्रैकलेस ट्वाय ट्रेन को अभी मुख्य सड़क और वनस्पति क्षेत्र में चलाया जाएगा बाद में इसके ट्रैक को और आगे बढ़ा दिया जाएगा।

जंगल ट्रेल:

पार्क के घने मानव-निर्मित जंगल में पर्यटकों के लिए पैदल घूमने के लिए 700 मीटर और 595 मीटर लंबे दो मार्ग बनाएं गए हैं। जिन्हे जंगल ट्रेल कहा जाता है। यहाँ घूमने से ऐसा लगता है कि जैसे असली जंगल में घूम रहें हैं। यहाँ भविष्य में नए पशु बाड़े और अन्य चिड़ियाघर सुविधाओं को विकसित करने की योजना है।

थ्री-डी थियेटर:

थ्री-डी थियेटर में वन्य प्राणियों पर आधारित थ्री-डी और टू-डी फिल्में दिखाई जाती हैं। इस थ्री-डी थियेटर में दो थ्री-डी फिल्में ‘आसमान पर विजय’ और ‘द लास्ट रीफ’ और एक टू-डी फिल्म ‘लेविटेटिंग लिजार्ड एंड इमॉर्टल जेलीफ़िश’ दिखाई जाती है। यहाँ एक साथ करीब 150 लोग बैठ कर फिल्म देख सकतें है।

बोटिंग:

Patna Zoo में बोटिंग के लिए मे 8 एकड़ में फैली झील है। इस झील का उपयोग मछली पालने के लिए भी किया जाता है। इस झील में 500 से अधिक कछुए और अन्य जलीय जन्तु भी पाले गए हैं। जू में आने वाले पर्यटक यहाँ पर बोटिंग का आनंद जरूर उठाते हैं।

कैंटीन:

जू के अंदर ही कैंटीन की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ पर सेल्फ-सर्विस की सुविधा उपलब्ध है। कैंटीन में खाने-पीने का सामान आसानी से मिल जाता है। आपको यहाँ दक्षिण भारतीय, इंडियन और चाइनीज खाना आराम से मिल जाएगा। इस दो-मंजिलों वाली कैंटीन के ऊपरी भाग में करीब 50 लोग एक साथ बैठ सकतें हैं।

यहाँ पर करीब 101 प्रकार के डोसे खाने को मिलतें हैं। इसके अलावा इस कैंटीन में बाहर बैठ कर खाने की सुविधा भी दी गई है। इससे पर्यटक जू के सुंदर नजारों को देखते हुए खाने-पीने का लुत्फ भी उठा सकतें हैं।

अब इस कैंटीन को इको-फ़्रेंडली बनाने की तैयारी चल रहै है। इसमें इस कैंटीन की प्लास्टिक की कुर्सी-टेबल की जगह भी बांस या लकड़ी की कुर्सी-टेबल का प्रयोग किया जाएगा। प्लास्टिक और थर्मोकॉल के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।

जानवरों का संरक्षण और जन्म:

पटना का चिड़ियाघर जंगली जानवरों के सफल प्रजनन और सुरक्षा के लिए बहुत गंभीर है। जंगली जानवरों का सफल प्रजनन कराना चिड़ियाघर प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी पर उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा जिससे उन्हे कई उल्लेखनीय सफलताएं भी मिली हैं। सफल प्रजनन के द्वारा पैदा हुए जानवरों के बारे में नीचे बताया गया है:

  • द ग्रेट वन हॉर्न राइनो ने इस जू में कई बार बच्चों को जन्म दिया है जिसका सर श्रेय पटना चिड़ियाघर की प्रजनन तकनीकों को जाता है। इसी वजह से 2008 में, पटना चिड़ियाघर की काफी सराहना हुई थी। आज इस चिड़ियाघर में दुनिया में राइनो की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। राइनो की संख्या के मामले में पटना चिड़ियाघर भारत में इस सूची में सबसे ऊपर है, और सैन डिएगो (अमेरिका में) के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
  • चिड़ियाघर के एक हिप्पोपोटेमस ने में 19 अप्रैल 2001 को पहली बार एक पुरुष हिप्पो को जन्म दिया था। तबसे लेकर अब तक कई हिप्पो का जन्म हो चुका है। 2007 में भी एक हिप्पो का जन्म इस जू में हुआ था।
  • 18 जून 2001 को एक तेंदुए ने दो शावकों को जन्म दिया। इन शावकों का जन्म करीब 16 सालके बाद हुआ है।
  • 29 जून 2001 एक घड़ियाल ने इस जू में पहली बार बच्चे को जन्म दिया है। इसके बाद यह सिलसिला इसी पर नहीं रुका और पिछले पिछले पांच सालों में जू में घड़ियालों की संख्या 13 से बढ़कर 129 हो गई है।
  • चिड़ियाघर में 12 जून 2001को पहली बार एक साही ने दो बच्चों को जन्म दिया।
  • 2007 में तीन जिराफ अमेरिका के सेंट डियागो जू से लाए गए थे। उनमे से मादा जिराफ शांति ने 9 जनवरी 2020 को एक नन्हे जिराफ को जन्म दिया है। इससे ज़ू में जिराफों की संख्या 5 से बढ़कर 6 हो गयी है।

नई पहल:

Patna Zoo जानवरों की भलाई में सदैव तत्पर रहता है। इसी मुहिम के तहत पटना जू अपने वहाँ रह रहे एकमात्र नर ज़ेबरा के लिए एक मादा ज़ेबरा लाने का प्रयास कर रह थे और उन्हे इस प्रयास में सफलता भी मिल गई है। पटना जू ने एक नर बाघ देकर के कोलकाता चिडिय़ाघर से बदले में एक मादा जेबरा लिया है।

इसी प्रयास के तहत जू प्रशासन ने नंदन कानन चिड़ियाघर, भुवनेश्वर से एक सफेद बाघ मँगवाया है इससे आशा की जा रही है कि अब जू में सफेद बाघों की संख्या बढ़ सकती है। पटना जू ने वन्य जीव दत्तक योजना भी शुरू की है जिससे एक आम इंसान भी जानवरों के संरक्षण में अपना योगदान दे सकता है।

 वन्य जीव दत्तक योजना:

इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति, परिवार, संस्था या कंपनी पटना जू के जानवरों को 1 दिन, 6 महीने या फिर 1,3 या 5 साल के लिए गोद ले सकता है। इसके लिए आपको एक निश्चित मूल्य चुकाना पड़ेगा। गोद लेने वाले व्यक्ति को पटना जू कुछ विशेष सुविधाएं देगा। पटना जू समय-समय पर बैंकों तथा अन्य संस्थाओं को अधिक से अधिक वन्य जीवों को गोद लेने के लिए संस्थान वन्य जीवों को गोद लेने के लिए प्रेरित करता रहता है। 

Patna Zoo की टाइमिंग:

पटना जू मार्च से अक्टूबर तक सुबह 5.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक खुला रहता है जबकि नवंबर से फरवरी के महीने में यह सुबह 6.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक खुला रहता है।

पटना जू सोमवार को बंद रहता है।

Patna Zoo की टिकट प्राइस:

पटना जू में एंट्री के लिए अलग टिकट और अन्य दूसरी सेवाओं के लिए अलग-अलग टिकट लेने पड़तें हैं। पटना जू के टिकट आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों ही तरह से ले सकतें हैं। ऑनलाइन टिकट आप जू की मोबाइल एप या वेबसाईट से और ऑफलाइन टिकट जू के टिकट काउंटर से ले सकतें हैं। इन टिकटों के दाम नीचे दिए गए है:

Patna Zoo एंट्री फी:

पटना जू की एंट्री फी बड़ों के लिए 30 रुपये और पाँच वर्ष से बड़े बच्चों के लिए 10 रुपये है।

Patna Zoo कैमरा शुल्क:

पटना जू में Non SLR/DSLR (Steel Photography) कैमरा ले जाने का अतिरिक्त शुल्क लगता है।

Non SLR/DSLR- 100/-

शादी-विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रम/उत्सव/Marriage फोटोग्राफी/विडिओग्राफी करने का शुल्क 3000/- रुपये निर्धारित है ।

Patna Zoo टॉय ट्रेन टिकट:

पटना जू में टॉय ट्रेन की सवारी करने के लिए बड़ों को 15 रुपये का और बच्चों को 10 रुपये का टिकट लेना पड़ता है।

Patna Zoo बोटिंग टिकट:

पटना जू में 4-सीटर बोटराईड करने के लिए 100 रुपये का 2-सीटर बोटराईड के लिए 80 रुपये देने पड़तें हैं।

निशाचर भवन और 3D थियेटर टिकट:

पटना जू के निशाचर भवन में प्रवेश निशुल्क है पहले यहाँ बड़ों का 10 रुपये और बच्चों का 5 रुपये का टिकट लगा करता था।

थ्री-डी थियेटर के शुल्क में भी कमी की गई है। पहले थ्री-डी थियेटर में बड़ों का टिकट 50 रुपये और बच्चों की टिकट 25 रुपये का हुआ करता था। अब थ्री-डी थियेटर में बड़ों का टिकट 30 रुपये और बच्चों का टिकट 15 रुपये में मिलता है।

थ्री-डी थियेटर में थ्री-डी पर्दे पर फिल्म देखने का शुल्क 10 या इससे ज्यादा के लोगों के ग्रुप के लिए 20 रुपये प्रति वयस्क और प्रति शिशु 10 रुपये है। यही फिल्म टू-डी पर्दे पर देखने के लिए बड़ों का 20 रुपये और बच्चों का 10 रुपये का टिकट लगेगा। 10 या इससे ज्यादा के लोगों के ग्रुप बड़ों के लिए 10 रुपये और बच्चों के लिए 5 रुपये का शुल्क देकर टू-डी पर्दे पर फिल्म का मजा उठा सकतें हैं। निशाचर भवन और थ्री-डी थियेटर के शुल्क में अब कमी की गई है।

Patna Zoo किड्स गार्डन टिकट:

पटना जू के किड्स गार्डन में बड़ों का 10 रुपये का और बच्चों का 5 रुपये का टिकट लगता है।

Patna Zoo पास:

अगर आप पटना जू रोज आना चाहतें हैं तो 1 महीने वाला मंथली पास 250 रुपये, चार महीने का पास 700 रुपये, छह महीने का पास 1200 रुपये और साल भर का पास 2000 रुपये में बनवा सकतें है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए पास की दरों पर 50 प्रतिशत की छूट की सुविधा उपलब्ध है। 

पटना जू के बारे में और जानकारी आपको इसके ऑफिशियल वेबसाईट पर मिल जाएगी। इस वेबसाईट पर पर आप पटना जू के ऑनलाइन टिकट भी खरीद सकतें हैं। ऑनलाइन टिकट लेने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता है और यह पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा तरीका है।

इस वेबसाईट पर जाकर आप पार्क की टाइमिंग का भी पता लगा सकते हैं। यहाँ पर पटना जू की मेल आइडी और फोन नंबर भी दिया गया है जिससे अगर आपको कोई जानकारी चाहिए तो आप मेल या फोन के माध्यम से पूछ सकतें हैं। टिकट के लिए आप जू के मोबाईल एप का भी प्रयोग कर सकतें हैं।

पटना ज़ू के अतिरिक्त पटना का राजधानी वाटिका (ECO Park) भी अपनी अनोखी बातों के लिए काफ़ी मशहूर है। जरूर पढ़ें – पटना का राजधानी वाटिका इन खास वजहों से इतना प्रसिद्ध हुआ।

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