Golghar Patna | पटना का गोलघर – इस एक गलती से गोलघर शो-पीस मात्र रह गया।

गोलघर, पटना 

Golghar Patna – बिहार राज्य न केवल भारत बल्कि विश्व में अपने ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। इसका इतिहास करीब 3000 सालों से भी ज्यादा पुराना है। इन प्राचीन स्थलों में एक Golghar भी है, जो करीब 336 साल पुराना ब्रिटिश काल के दौरान बनाया गया वस्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। अपने गोल आकार की वजह से इसे गोलघर कहा जाता है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा संरक्षित धरोहरों में से एक है। वर्ष 1979 में इसे राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया।

Golghar बिहार राज्य के हृदय पटना शहर के गांधी मैदान की पक्षिम दिशा में स्थित है। पहले इसे ”द ग्रेनरी ऑफ़ पटना” के नाम से जाना जाता था। गोलघर को देखकर मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि Golghar को किसने और क्यों बनवाया था? तो इसका उत्तर यह है कि इसे वर्ष 1770 में पड़े भयंकर सूखे को देखकर अनाज को सुरक्षित रखने के लिए उस समय के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग के कहने पर ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जान गार्स्टिन के द्वारा बनवाया गया था।

यह पटना शहर की सबसे ऊँची इमारतों में से एक है। इसे पटना का प्रतीक भी कहा जाता है। इसे पटना शहर की सबसे सुन्दर जगहों में से एक माना जाता है। यहाँ से आप गंगा नदी एवं सारे पटना शहर के सुन्दर नजारों का आनंद लें सकतें हैं। बरसात के समय जब गंगा नदी अपने उफान पर होती है तो यह नजारा देखने लायक होता है। अपनी इन्ही खूबियों के कारण ही ये पटना शहर के दर्शनीय स्थलों में से एक माना जाता है।

Golghar को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। सामान्य रूप से प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार पर्यटक यहाँ घूमने आतें हैं। यहाँ पर एक ओपन एयर थिएटेर और बच्चों के खेलने के लिए मैदान है। यहाँ की हरियाली यहाँ आने वालों का मन मोह लेती है। इस हरियाली को देखने यहाँ रोजाना सैकड़ों लोग गोलघर आते हैं। यहाँ होने वाला लेजर और लाइट शो भी यहाँ के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। नव वर्ष के मौके पर तो यहाँ पर 5000 लोग आए थे।

Golghar शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित है इसलिए इसके आस-पास का माहौल काफी शांत है। इसी शांत माहौल की वजह से यह उन लोगों की पसंदीदा जगहों में से एक हैं जो शहर के शोर-गुल से थोड़ी शांति चाहतें हैं।

भारत के कोने-कोने और यहाँ तक की देश-विदेश से भी लोग इसे देखने आते हैं। अगर आप भी Golghar आना चाहतें हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें क्योंकि आगे लेख में ऐसी बातें बताई गयी है जो शायद आपको नहीं पता होगी। इस लेख को पढ़कर आपको गोलघर से जुड़ी हुई सारी जानकारियाँ मिल जाएंगी जिससे आपकी गोलघर की यात्रा काफी आसान और सुखमय हो जाएगी।

Golghar का इतिहास:

वर्ष 1770 में बिहार और ऑडिशा दोनों बंगाल का हिस्सा हुआ करते थे। इसी वर्ष में बंगाल में बहुत ही भयंकर अकाल पड़ा जिसमें करोड़ों लोगों की जान चली गई। 1770 में पर्याप्त मात्रा में वर्षा नहीं हुई जिसकी वजह से भयंकर सूखा पड़ा था।

इस सूखे से चावल की दो फसलें भी बर्बाद हो गईं थीं। अनाज के भंडारण की उचित व्यवस्था न होने से यह अकाल बहुत ही विनाशकारी साबित हुआ। इस अकाल के द्वारा हुए भीषण नुकसान से तत्कालीन गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स ने विशाल अनाज भंडार की एक श्रृंखला का निर्माण करने की सोची। इसके लिए उन्होंने बंगाल राजस्व परिषद के सदस्य, जॉन शोरे के कलकत्ता से पटना लौटने पर उनसे सुझाव मांगे। शोरे द्वारा दिए गए सुझावों में से एक अनाज के बड़े भंडारों का निर्माण भी शामिल था।

ये अनाज भंडारघर अकाल जैसी आपदाओं मे काम आ सकतें थे। इसी लिए अन्य अधिकारियों के विरोध के बावजूद वारेन हेस्टिंग्स ने ब्रिटिश इंजिनियर कैप्टन जान गार्स्टिन को इसे बनाने का आदेश दे दिया। इसका निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू हुआ और 20 जुलाई 1786 को खत्म हुआ।

क्या आपको पता है की इसे बनाते समय एक बहुत बड़ी भूल हो गई थी जिसकी वजह से शायद गोलघर कभी भी खुल नहीं पाता? उस भूल को जानने के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

वास्तु-कला:

गोलघर की वास्तु-कला की सबसे खास बात यही है कि ब्रिटिश काल में बना होने के बाद भी इसकी संरचना प्राचीन भारत के बौद्ध स्तूपों के जैसी है। इसका आकार मधुमक्खी के छत्ते के जैसा बनाया गया था।इसकी इसी अर्ध-गोलाकार सरंचना के कारण इसका नाम “गोलघर” पड़ा। गोलघर अपने आप में ही अनोखी इमारत है।

गोलघर के अंदर एक ही आवाज 27-32 बार गूँजतीं है। इसके आकार के कारण इसकी तुलना मोहम्मद आदिल शाह के मकबरे से भी की जाती है। गोलघर की ऊंचाई 29 मीटर , नींव 125 मीटर और इसकी दीवारें 3.6 मीटर मोटी है जो की अनाज को नमी से बचाने में काफी सहायक हुआ करतीं थीं। गोलघर में एक भी खंभे का न होना इसे वास्तु-शिल्प का एक अद्भुत उदाहरण बनाता है।

गोलघर के ऊपरी भाग तक चढ़ने के लिए 145 घुमावदार सीढियाँ हैं। इन सीढ़ियों को मजदूरों के लिए बनाया गया था। मजदूर एक तरफ से अनाज की बोरियाँ लेकर ऊपर तक चढ़ जाते थे फिर अनाज को एक छेद के जरिए अनाज घर में गिराकर दूसरी तरफ की सीढ़ियों से नीचे उतर आते थे। वैसे तो इसमे लगभग 1,40,000 टन तक अनाज को सुरक्षित रखा जा सकता था पर इसको बनाने में हुई एक भूल से इसे कभी इसकी अधिकतम क्षमता तक इस्तेमाल नहीं किया जा सका।

वह भूल यह थी की अनाज निकालने के लिए जो दरवाजे बनाए गए थे वो अंदर की तरफ खुलते थे जिससे अगर इसे पूरी तरह से अनाज से भर दिया जाता तो इसके दरवाजे कभी खुलते ही नहीं। इसलिए कभी भी इसे पूरी तरह से नहीं भरा नहीं जाता था।

गोलघर के बारे में एक कहानी बड़ी प्रसिद्ध है, एक बार नेपाल देश के राजकुमार पटना घूमने आए थे। वह गोलघर की सुंदरता से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने अपने घोड़े से ही गोलघर का ऊपर से नीचे तक चक्कर लगा दिया।

मुख्य आकर्षण:

वैसे तो Golghar अपनी वास्तु-कला, मनोरम नजरों और इतिहास के लिए विश्व प्रसिद्ध है। पर्यटकों के अनुभव को और भी शानदार बनाने के लिए और भी कई इंतजाम किए गए है। जिनमे से एक यहाँ का प्रसिद्ध लेजर और लाइट शो भी है।

यह यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। यहाँ पर सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को 6:15 और 7:15 पर लेजर और लाइट शो होता है जो की बहुत ही आकर्षक और मनोरंजक होता है। इसमें बहुत ही सुंदर चित्रों, ध्वनियों और रंगीन लेजर लाइटों के माध्यम से पटना और गोलघर के अतीत को दिखाया जाता है। लेजर और लाइट शो के टिकेट शो शुरू होने के आधे घंटे पहले ही मिलतें हैं।

गोलघर टिकट प्राइस:

कुछ समय पहले तक गोलघर आने के लिए कोई एंट्री फी नहीं हुआ करती थी पर अब आपको 5 रुपये देने पड़ेंगे, और अगर आप लेजर और लाइट शो देखना चाहतें हैं तो तो आपको प्रति व्यक्ति 25 रुपये देने पड़ेंगे। विद्यार्थियों के लिए ये फी केवल 15 रुपये है। यदि आप लेजर और लाइट शो का टिकट लेते हैं तो आपको 5 रुपये का टिकट लेने की कोई जरूरत नहीं है।

टाइमिंग:

गोलघर पर्यटकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को यह बंद रहता है।

Golghar Patna का विशेष उल्लेख:

Golghar को 2019 की हिन्दी फिल्म इंडियाज मोस्ट वांटेड में दिखाया गया था। इस फिल्म को गोलघर, काली घाट और बहादुरपुर में फिल्माया गया था। इस फिल्म की शूटिंग करने पटना आए प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर ने पत्रकारों से बात-चीत करते हुए कहा कि “मेरी पिछली फिल्म हॉफ गर्लफ्रेंड में भी पटना के कुछ दृश्य थे पर कोई भी अभिनेता उसे फिल्माने के लिए पटना नहीं आया था बल्कि फिल्म की शूटिंग बनारस में की गयी।

मैंने जब इंडियाज मोस्ट वांटेड की पटकथा सुनी थी तभी मैंने पटना आने और यहाँ शूटिंग करने की ठान ली थी। मेरा मानना है की फिल्मों की शूटिंग के लिए ये आदर्श जगह है। कल जब मैं गोलघर पर शूट कर रहा तब मुझे वहाँ से बहुत ही मनोरम दृश्य दिखाई दे रहे थे। एक तरफ मुझे विकसित हो रहा पटना, छोटे-छोटे गावँ और गंगा नदी दिखाई दे रही थी और दूसरी तरफ राजनीतिक रैलियाँ और शहर की चहल-पहल दिखाई दे रही थी।

मुझे गर्व है कि मेनस्ट्रीम बॉलीवुड अभिनेता के रूप में, मैं पटना में शूटिंग करने वालों में से एक हूँ। वहां मिले प्यार से अच्छा महसूस हुआ। मैंने वहां की स्थानीय संस्कृति को अपनाया। अगर मैं इस सुंदर राज्य की शूटिंग को लेकर नकारात्मक मानसिकता बदल सका, तो उससे मुझे बहुत खुशी होगी। मुझे आशा है कि मेरे बाद अन्य कलाकार भी पटना और बिहार में शूटिंग के लिए आएंगे, क्योंकि इतनी सारी फिल्में बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी हैं। मुझे लगता है कि मैं पटना का ब्रांड एंबेसडर बन सकता हूँ।”

Golghar Patna के बारें मे अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप बिहार टूरिज़्म की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जा सकतें हैं। यहाँ आपको बिहार प्रांत के सभी दर्शनीय स्थलों की जानकारी मिल जाएगी।

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